सहारनपुर में सिखों पर अत्याचार-दुकानें जल ाईं-तीन की मौत, कर्फ्यू लागू

सहारनपुर में सिखों पर अत्याचार-दुकानें जलाईं-तीन की मौत, कर्फ्यू लागू

सिख भाइयों की रक्षा के लिए डट जाएँ – लखविंदर सरीन

-बदमाशों ने नाम पूछ पूछ कर गोली से उड़ाया-

हिन्दू क्रांति दल के वरिष्ठ नेता श्री लखविंदर सरीन ने हिंदुओं से अपील की है की वो सहारनपुर में सिख भाइयों की रक्षा के लिए डट जाएँ । श्री सरीन ने बताया कहा कि सिख भाइयों पर सहारनपुर में मुस्लिमो द्वारा हमला करके दुकाने फूंकीं और दो सिख भाइयों के मरने की खबरका भी चर्चा है । सरीन ने ऐलान किया कि हिन्दू क्रांति दल उत्तर प्रदेश सिख समाज के साथ है

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो गई है और करीब दो दर्जन लोग घायल हुए हैं। हालात नियंत्रित करने के लिए सेना को बुला लिया गया है।

इस बीच मुख्य सचिव ने इस मामले में आला अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।

मुख्य सचिव ने वहां के खुफिया अधिकारियों को इसका जिम्मेदार माना है। इस बीच शासन ने हालात को काबू में करने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को सहारनपुर भेजा है।

सहारनपुर में भड़के बवाल के बाद मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सख्त रुख अपनाते हुए एक बैठक बुलाकर सभी बड़े अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने सहारनपुर में तैनात खुफिया अफसरों की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर की।

मुख्य सचिव ने कहा कि उनके द्वारा ऐसी घटनाओं की जानकारी उच्च अधिकारियों को समय से क्यों नहीं दी जाती है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर के आस-पास जनपदों से भी आवश्यकतानुसार पुलिस बल तत्काल तैनात करा दिए जाएं। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि उनका दायित्व है कि प्रत्येक दशा में शहर में शान्ति-व्यवस्था कायम की जाए।

आलोक रंजन ने निर्देश दिए हैं कि सहारनपुर में हुई दु:खद घटना को नियंत्रित करने के लिए इसमें लिप्त असामाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के साथ किसी भी अराजक तत्व को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं में लिप्त होने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए और विधि के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि सहारनपुर शहर में पर्याप्त पीएसी एवं केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बल तैनात कर शहर में शान्ति व्यवस्था कायम की जाए। आवश्यकतानुसार शहर के अन्य क्षेत्रों में भी कर्फ्यू लगाकर घटना को नियंत्रित किया जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव गृह राकेश बहादुर, पुलिस महानिदेशक एएल बनर्जी, सचिव गृह राजीव अग्रवाल एवं कमल सक्सेना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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इस बीच शासन ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भुवनेश कुमार और आईपीएस अधिकारी दीपक रतन को हेलीकाप्टर से सहारनपुर भेजा है। साथ ही छह कंपनी सीआरपीएफ, 18 कंपनी पीएसी के अलावा भारी फोर्स सहारनपुर के लिए रवाना किया गया है।

गौरतलब है कि सहारनपुर में मामूली विवाद के बाद दो वर्गो में संघर्ष छिड़ गया। कर्फ्यू लगने के बावजूद दंगा बेकाबू होते देख दोपहर तक सेना बुला ली गई। हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत हुई है। हालांकि पुलिस की तरफ से अभी एक ही व्यक्ति के मारे जाने की पुष्टि हुई है।

इससे पूर्व उग्र भीड़ ने कई वाहनों, दुकानों व घरों में आग लगा दी। प्रशासन ने शहरी क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है, लेकिन हालात अब भी काबू से बाहर हैं। स्थिति पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से सेना पूरे शहर में फ्लैग मार्च कर रही है।

कुतुबशहर थाना क्षेत्र में अंबाला रोड स्थित एक धार्मिक स्थल की जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। शुक्रवार शाम को उक्त जमीन पर हो रहे निर्माण कार्य को लेकर वहां पथराव हुआ था। हालांकि शुक्रवार का बवाल कल देर रात ही थम गया, लेकिन दोनों पक्ष शनिवार को फिर भिड़ गए।

सुबह दर्जनों वाहनों व दुकानों में आगजनी की गई। जमकर पथराव और गोलीबारी भी हुई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बवाल में सिटी मजिस्ट्रेट और लगभग आधा दर्जन पुलिसकर्मी समेत लगभग दो दर्जन लोग घायल हो गए। कई घायलों को गोली भी लगी है। घटना में एक पुलिसकर्मी समेत दो लोगों के मरने की भी खबर है। बवाल करने वालों ने फायर ब्रिगेड के दफ्तर को भी फूंक दिया। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सहारनपुर हिंसा पर जम्मू के सिखों में रोष

सहारनपुर में सिखों के धार्मिक स्थल की जमीन को लेकर हुई हिंसा पर जम्मू-कश्मीर के सिखों में भी गहरा रोष है। आल जेएंडके सिख यूनिटी फोरम के प्रेसीडेंट मनप्रीत सिंह ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सही समय पर कदम उठाने में विफल रही, जिसके कारण हिंसा ने विकराल रूप ले लिया।

सैकड़ों दुकानों में तोड़फोड़ करने के अलावा आग लगा दी गई। सिख समाज से जुड़े लोगों पर हमला कर उन्हें घायल किया गया, जबकि सहारनपुर पुलिस प्रशासन चुपचाप मामले को देखता रहा।

वाइस प्रेसीडेंट धीरज टेक्कर ने कहा कि यूपी सरकार सभी धर्मों के लोगों और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने यूपी सरकार को हटाकर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि यूपी सरकार यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती तो सिख सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। इस मौके पर पुनीत सिंह, सतिंदर सिंह, सनी परिहार, रणज्योत सिंह, अमनदीप सिंह, सिमरनजीत सिंह, स्तयांकर शर्मा, भूपिंदर सिंह, तेजिंदर सिंह उपस्थित थे।

सिखों को संरक्षण देने की मांग

देहरादून: केंद्रीय श्री गुरु सिंह सभा के प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंप सहारनपुर में सिख समुदाय की सुरक्षा करने की मांग की है।
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि सहारनपुर में सिख समुदाय का उत्पीड़न हो रहा है। शासन प्रशासन मौन है और सिखों को वहां कोई संरक्षण नहीं दिया जा रहा। उन्होंने गुहार लगाई कि जारी दंगे समाज के लिए भी खतरनाक है। उन्होंने राज्यपाल से तुरंत सहारनपुर सेना भेजकर सिखों की रक्षा करने की मांग की है। प्रतिनिधि मंडल में सरदार हरपाल सिंह सेठी, अमरजीत सिंह, मनमोहन सिंह, त्रिलोचन सिंह, जसबीर सिंह, रणजीत सिंह, प्रीतम सिंह, बलविंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह आदि शामिल रहे।

नासमझ नौकरशाही, बेलगाम बलवाई

गुरुद्वारा-अंबाला रोड से शुरू हुई और फिर पूरे शहर को अपने चपेट में लेने वाले दंगे की वजह की पड़ताल होती रहेगी। लेकिन सहारनपुर के प्रशासन, पुलिस और खुफिया तंत्र की नाकामी की जांच की कोई जरूरत नहीं है। हिंसा और उपद्रव जि140726074651_saharanpur_police_624x351_bbcस तरह से पूरे शहर में फैला उससे साफ है कि जिले का पूरा अमला हद दर्जे का अनुभवहीन और नासमझ है।
सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारे के भवन का निर्माण कर रहे थे दूसरा पक्ष इस भूमि को कब्रिस्तान की भूमि बताकर उसका विरोध कर रहा था। पुलिस-प्रशासन इस विवाद की संवेदनशीलता का जरा भी अंदाजा नहीं लगा सका। जबकि विवाद पुराना था और मसला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका था। हिंसा शुरू होने के बाद भी घटों तक हालात पुलिस के नियंत्रण से बाहर रहे। बवाली बेलगाम थे और पुलिस बेबस। पुलिस-प्रशासन के अफसरों को मौके से दौड़ा तक लिया गया। जिस स्थान पर निर्माण हो रहा था, उसके लिए सहारनपुर विकास प्राधिकरण से अनुमति नहीं थी। अगर संवेदनशीलता को एक क्षण के लिए भूल भी जाए तो तकनीकी तौर पर भी निर्माण कैसे हो रहा था, इसका जवाब किसी अफसर के पास नही है।
कुतुबशेर थाने में डीएम व एसएसपी अफसरों व गणमान्य लोगों के साथ बैठकर विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहे थे। कहा जा रहा है कि दूसरी ओर अफसरों के साथ इस बैठक में बैठे दो नेताओं के इशारे पर बवाल शुरू हो गया। कमिश्नर, डीआइजी की मौजूदगी में भी दंगाइयों ने पथराव किया। अंबाला रोड, रायवाला, नुमायश कैंप, गुरूद्वारा रोड, नेहरू नगर आदि स्थानों पर लूटपाट व आगजनी होती रही। हाथ में रिवाल्वर और माउजर लेकर पुलिस के सामने से ही दंगाई मोटरसाइकिल से निकलते रहे। सड़क पर चलते हुए लोगों के नाम पूछ कर उन पर गोलियां दागी गईं। लेकिन पुलिस अब तक तमाशबीन थी और अपनी जान बचाने की जुगत में लगी थी। इससे पुलिस के जज्बे और प्रशिक्षण का भी पता चलता है। बवाल और उपद्रवी बढ़ते जा रहे थे,लेकिन पुलिस व प्रशासनिक आला अधिकारी फोर्स की तादाद नहीं बढ़ा पा रहे थे। कमिश्नर तनवीर जफर अली ने जब हालात बेकाबू देखे तो उन्होंने डीएम को क‌र्फ्यू लगाने के लिए कहा। इस आदेश पालन में ही आधा घंटा लग गया। जब गुरूद्वारा रोड व अंबाला रोड की आग अन्य क्षेत्रों में पहुंची तो डीएम ने कुतुबपुर, मंडी व सदर थाना क्षेत्र में क‌र्फ्यू लगाने की घोषणा की। कमिश्नर के बाद मंत्री राजेन्द्र राणा ने डीएम से बातचीत की और पूरे शहर में क‌र्फ्यू लगा दिया गया। 11 बजे से सायं तीन बजे तक पीड़ितों ने डीएम का नंबर मिलाया, पर वह रिसीव नही हुआ। इसके बाद सरकारी मोबाइल ही बंद कर दिया। पत्रकार वार्ता में डीएम की सफाई थी कि भीड़ में होने के कारण फोन नहीं उठाये। सवाल उठता है कि आपात स्थिति में ही लोगों को मदद की जरूरत थी, लोग भी भीड़ और बलवे में घिरे होने के कारण फोन कर रहे थे।

फेल हुआ दंगा एक्शन प्लान

शनिवार को जिस तरह गुरुद्वारा रोड व अंबाला रोड समेत शहर केकई हिस्सों में बवाल हुआ, उसमें पुलिस प्रशासन का दंगा एक्शन प्लान फेल नजर आया। यह स्थिति तब है जब तीन दिन बाद ईद है। शहर में पुलिस के अलावा 2 जोनल मजिस्ट्रेट व 6 सेक्टर मजिस्ट्रेट शिफ्ट वार तैनात किए गए हैं। पीएसी और पैरा मिलिट्री कंपनी भी चुनाव के मद्देनजर सहारनपुर आ चुकी हैं, लेकिन फोर्स के आने मे लेटलतीफी ने दंगा नियंत्रण की पोल खोल दी। कंट्रोल रूम को सक्रिय कर जिला पुलिस को उससे जोड़ने, धारा 144 को सख्ती से लागू करने, ट्रैफिक डायवर्ट करने, पुलिस लाइन में घटा बजाकर अतिरिक्त पुलिस को सक्रिय करने, अफसरों के आदेश पर पुलिस बल, टीयर गैस, स्क्वायड, रबर बुलेट, पीएसी व केंद्रीय बलों को संबंधित स्थानों पर रवाना करने, वज्र वाहन, केन वाहन, खुफिया विभाग से पल पल की रिपोर्ट लेने आदि कार्य होने थे पर शनिवार को सबकुछ हवा-हवाई नजर आया।

मुजफ्फरनगर से मंगाने पड़े ड्यूटी चार्ट

सहारनपुर सांप्रदायिक हिंसा के लिहाज से सदैव संवेदनशील रहा है। लेकिन अंबाला रोड पर हुई हिंसा में पुलिस-प्रशासन के दंगा नियंत्रण की पोल खुल गई। अधिकारियों के अनुभव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें यह तक नहीं समझ में आ रहा था कि फोर्स और अधिकारियों की तैनाती कैसे की जाए। इसके लिए ड्यूटी चार्ट हाल में दंगे के त्रासदी से जूझे मुजफ्फरनगर से आननफानन में मंगाने पड़े।

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